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हर बार क्यों मैं ही गुनेहगार होती हूं साबित, अकेले ही किया होता सब तो कोई बात थी – नारीत्व

पिछले दस दिनों से एक अश्लील वीडियो के वायरल होने पर हमारे प्रदेश के और अन्य कुछ प्रदेशों के लोगों ने मेरे से इस विषय पर मेरा पक्ष और विचार जानने के लिए चर्चा की जिसमें पत्रकार, अधिकारी तथा सामान्य वर्ग के लोग थे (महिला एंव पुरूष)। संभवत: हर किसी ने उस वीडियो को देखा था, वर्ना चर्चा ना करते पर किसी ने इस बात को स्वीकारा और किसी ने नहीं स्वीकारा। यहां जब इस पूरे प्रकरण पर मैंने खेद जताया और पत्रकारों के पूछने पर घटना की निंदा करते हुए मैंने महिला की निजता के कानून का हवाला दिया और बार-बार पीडि़त महिला को प्रताडि़त ना करने को कहा (अखबारों ने उसे छापा भी है) तो, इस पर महिलाओं और पुरूषों का कहना था कि गलती की है उक्त महिला ने, किसी ने कहा ”छीÓÓ गंदी औरत, किसी ने कहा ”घटिया पनÓÓ किसी ने कहा डोगरा जी, किया तो चलो कोई बात नहीं, पर वीडियो नहीं बनाना था? किसी ने कहा लड़की के बच्चों पर क्या असर पड़ेगा? किसी ने कहा पति का क्या होगा? किसी ने लड़की के परिवार के बारे में कहा। पर मैं हैरान था, कि लड़का जो कि बराबर का भागीदार था उस कृत्य में उसके बारे में किसी ने कुछ नहीं कहा.? जिसने भी बात की सिफऱ् और सिफऱ् लड़की की बात की। इससे ये बात साबित होती है कि, समानता की बात हमारे देश में करते जरूर हैं, पर एक समान कृत्य के लिए महिला एवं पुरूष के लिए मापदण्ड आज भी अलग-अलग ही हैं सबसे हैरानी की बात ये भी है कि, लोगों ने उक्त महिला के अन्य कई शालीन फोटो, जोकि अन्य महिलाओं के साथ लिए गए थे उनको भी इंटरनेट पर वायरल किया, लेकिन ना तो पीडि़त महिला के साथ फोटो में नजऱ आने वाली महिलाओं ने, ना हिमाचल महिला आयोग ने और ना ही किसी बुद्धिजीवी ने कोई एतराज जताया। किसी ने इस बात को समझा ही नहीं के जाने-अंजाने वह सारी महिलाएं भी चरित्र हनन के लपेटे में आ गईं (ये बात भी महिलाओं की निजता से जुड़ी है के बिना इजाज़त उनकी फोटो सार्वजनिक करना)। मैं मानता हूं अश्लील वीडियो बनाना सही नहीं और उसे आगे भेजना तो बिलकुल ही गलत है। लेकिन जिस देश में एडल्ट्री कानून को वैधता दी जा चुकी है, उसका फायदा केवल पुरूष को ही मिले और महिला को नहीं, क्या ये उचित है..? जब कोई महिला और पुरुष अपनी इच्छा से संबंधो में जाते हैं, तब यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है, तो फिर किसी को एतराज केवल महिला पर क्यों?…. वो इसलिए के बाकी पुरूषों ने कोशिश तो अपने-अपने तरीके से बहुत की होती है, पर महिला ने उन्हें घास ना डाल कर किसी और को अपना बना लिया। बस शुरू हो गई प्रतिशोध की भावना और फिर जैसे ही महिला के अंतरंग संबधो का पता चलता है, तो खेल शुरू हो जाता है ”कि या तो हमारे साथ रिश्ता बनाओÓÓ या फिर इज्ज़त गंवाओ। इन सब में भी महिला के पुरूष साथी साईड हो जाते हैं और उसे कोई कुछ नहीं कहता, ना तो कार्य स्थल पर, ना घर में और ना समाज में? सबकी निगाहें महिला पर केन्द्रित हो जाती हैं कि कब उसका शौषण करें। मैंने तलाक से लेकर एसिड अटैक, शौषण और पुनर्वास पर महिला आयोग तथा पुलिस के साथ कांउसलिग का बहुत काम किया है, उसमें मैंने पाया कि महिला यदि ऐसे किसी कृत्य में पकड़ी जाती है तो बाकी पुरूष उस महिला पर अपना हक समझने लगते हैं, मानसिकता ऐसी कि ”उसके साथ भी तो थी फिर हमारे साथ क्या फर्क पड़ता हैÓÓ और यहीं से अपराध की शुरूआत होती है। मैं पहले केन्द्र में था और अब विगत पांच वर्षों से अपने हिमाचल में हूं, तो यहां पर भी मैंने कई जिलों में लड़कियों की परेशानी यही पाई कि जब उनके गांव या पंचायत या आस-पास के लड़को को पता चलता है की, अमुक लड़की की दोस्ती दूसरे इलाके के अमुक लड़के से हैं तो, वह लड़के इसी ताक में रहते हैं की उनको मौका कब मिलेगा (गांव का भाईचारा जाए भाड़ में)। अगर मौका ना मिले तो शरारती लड़के, लड़की के घरवालों को बताते हैं कि आपकी लड़की आज कालेज में नहीं फ्लां पिक्चर हाल में थी ”मैने खुद देखाÓÓ है जी। घरवाले टूट कर लड़की पर पड़ जाते हैं परंतु उस लड़के से कोई नहीं पूछता ”साले कुत्तेÓÓ तू वहां कालेज छोड़ कर क्या कर रहा था..? कुछ समझ आया बुजुर्गों? बात का मर्म ये है कि, औरत से चूक भी हो जाये तो गुनाह हो जाता है और पुरूष से गुनाह भी हो जाये तो मामूली चूक कही जाती है। अच्छा मैंने कई बार लोगों को कहते सुना है ”कि आदमी का क्या है, आदमी तो नंगी तलवार होता हैÓÓ आपने भी सुना होगा शायद ये डॉयलॉग? पर यदि आदमी नंगी तलवार है, तो आप बताओ फिर औरत क्या है? नहीं पता..? चलो ये भी हम ही बता देते हैं औरत ढंकी हुई वो तलवार है जो मर्यादा की मयान में तब तक रहती है जब आदमी खुद उसे मयान से बाहर खींच कर खुद नंगा ना करे और एक बार आदमी इस तलवार को मर्यादा की मयान से बाहर ले आये, तो नतीजा क्या होता है, ये सब आपने वायरल वीडियो की खबर में सुना ही होगा। औरत को वैश्य या देह व्यापार करने वाली, कोठे वाली सब कहते हैं लेकिन उसे वैश्य बनाया किसने..? कोठे पर बिठाया किसने? सालों जाओ ही मत ना वेश्यालय और कोठे पर, सब अपने आप बंद हो जायेगा और मजबूर नारी भी मुख्यधारा में आ जायेगी। पर ना जी, ऐसा कोई नी करता, तो भईया धर्मात्मा मत बनो ज्यादा? अगर डोगरा दस महिलाओं से बात कर सकता है तो उसकी बीवी भी दस लोगों से बात कर सकती है, समझे। इसलिए किसी भी अश्लील वीडियो को देख कर केवल महिला पर ही ऊँगली उठाना बंद करो।

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Devbhumi Mirror Radio News 30072019

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