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आऊटसोर्स एवं ठेकेदारी प्रथा से मजदूरों का शोषण : जगत राम

कहा बंद हो श्रम कानून में मजदूर विरोधी फेरबदल

सीटू का पांचवां जिलास्तरीय सम्मेलन बचत भवन चंबा में संपन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता सीटू के राज्य प्रधान जगत राम ने की। सम्मेलन में सरकार की मजदूर व जनविरोधी नीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इन नीतियों के खिलाफ आंदोलन छेडऩे का फैसला लिया गया। इसके साथ ही सीटू ने न्यूनतम 18 हजार रुपए वेतन निर्धारित करने की मांग भी उठाई है। सीटू के राज्य प्रधान जगत राम ने कहा कि केंद्र सरकार मजदूर व जनविरोधी फैसलों को अमलीजामा पहना रही है। श्रम कानून मजदूरों के खिलाफ और मालिकों के पक्ष में बहाल किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की इन गलत नीतियों से अमीर-गरीब की खाई बढ़ती जा रही है। जगत राम ने कहा कि सरकार स्थायी रोजगार की बजाय ठेकेदारों व आउटसोर्स के माध्यम से काम दे रही है। इससे मजदूरों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है। उन्होंने साथ ही मांग उठाई कि श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी फेरबदल वापस लिए जाएं। सम्मेलन में सीटू की जिला महासचिव सुदेश ठाकुर ने तीन वर्षों की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को स्थायी रोजगार के साथ न्यूनतम वेतन देने की मांग भी की। उन्होंने जिला में संगठन को ओर मजबूत करने को लेकर भी विचार रखे। सम्मेलन में निजी कंपनी के कर्मचारियों की पिछले 27 दिनों से जारी हड़ताल का समर्थन किया गया। सम्मेलन के दौरान 23 सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। इस नवगठित कमेटी की कमान नरेंद्र कुमार को सौंपी गई। इसके अलावा देवी सिंह व रेखा उपाध्यक्ष, सुदेश ठाकुर महासचिव, पुष्पा सचिव व अलोक शर्मा को कोषाध्यक्ष चुना गया। इस एकदिवसीय सम्मेलन में काफी तादाद में सीटू कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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Written by Rahul Chaubhiyal

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