श्रावण मास के पहले सोमवार में लगा शिव भक्तों का तांता

हजारों की तादाद में भक्तों ने खीर गंगा में लगाई डुबकी

श्रावण मास के आते ही, यंू तो तमाम शिव मन्दिरों में भक्तजनो की कतारें लग जाती है, लेकिन ऐतिहासिक शिव मन्दिर बैजनाथ की बात ही निराली है। किवंदति के अनुसार बैजनाथ स्थित भोले नाथ के दरबार में भगवान शिव अर्धनारेश्वर के रूप में विराजमान है, अर्थात यह शिव और र्पावती एक छत्र मौजूद है यही वज़ह है कि, भोले नाथ की पिण्डी पर जल दूध और बिलपतरी चढ़ाने से भक्तजनों की तमाम मूरादे पूरी हो जाती है। श्रावण मास के पहले सोमवार से लेकर आखिरी सोमवार तक यहां भक्तो की लम्बी-लम्बी कतारें लगी रहती हैं। देश-विदेश से आए शिव भक्तजन अपनी मूरादे पूर्ण करने की इच्छा से अपने श्रद्वासुमन अर्पित करते हैं। सावन माह के पहले सोमवार को दूर-दूर से आए शिव भक्तों  ने लघु हरि़द्वार खीर गंगा में स्नान कर भगवान भोले नाथ के चरणों में जल अर्पित कर श्रद्वा सुमन भी अर्पित किए। श्रावण माह के पहले सोमवार को जहां इन्द्र देव तो नहीं बरसे, लेकिन प्रशासन द्वारा किए गए इन्तजाम से भक्तों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ा। वहीं ऐतिहासिक शिव मन्दिर बैजनाथ में सुबह 4 बजे से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था और मन्दिर परिसर भोलेनाथ के जयकारों से गुंज उठा। श्रावण मास का अपना एक विशेष ही महत्व है, पुराणों के अनुसार, सागर मंथन के समय जब भोले नाथ ने जहर पी लिया था जिसके कारण भगवान का कंठ नीला पड़ गया था तब नील कंठ तो कहलाए पर विष के प्रभाव से उनके मस्तिष्क से तीव्र ज्वालाएं निकलने लगीं उन ज्वालाओं को शांत करने के लिए जलाभिषेक किया। तब से यह प्रथा चली आ रही हैं इसलिए श्रावण का महीना जलाभिषेक के लिए अपना ही महत्व रखता है। वैसे तो, वर्ष भर भोले नाथ का जलाभिषेक किया जाता है पर इस महीने जलाभिषेक तथा बेल पत्र अर्पित करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। वहीं स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था की तारीफ  करते हुए कहा कि पहली बार बैजनाथ में लगने वाले मेलों ऐसी व्यवस्था की गई है, जिससे ना केवल दर्शन करने आए श्रद्वालु बल्कि बाहरी राज्यों से आए व्यापारियों की सुविधा का भी ध्यान रखते हुए वाटरप्रूफ  टैंट की व्यवस्था की है ताकि बारिश के होते भी शिव भक्तों को दिक्कतों का सामना ना करना पड़े।

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Written by Johny Khan

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